कृषि के तीनों कानूनों पर उच्च न्यायालय ने दिया बड़ा फैसला।
45 दिन से ऊपर हो चुके हैं भारतीय किसान को आंदोलन करते हुए यह आंदोलन भारत सरकार द्वारा बनाए कृषि के तीनों कानूनों को वापस लेने के लिए किया जा रहा है सरकार और किसान के बीच लगभग 8 बार वार्ता हो चुकी है लेकिन कोई भी ठोस फैसला सामने निकलकर नहीं आया है सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जानने के लिए पूरा पढ़ें।
8 बार सरकार से वार्ता होने के बाद भी कोई ठोस फैसला नहीं निकला 9 वीं बैठक 15 जनवरी 2021 को होनी है इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन के मामले में अपना बड़ा फैसला सुना दिया है सुप्रीम कोर्ट का कहना है। अगर किसान आंदोलन पर जल्द ही फैसला नहीं लिया गया तो भारत के अंदर शांति भंग हो जाएगी और अगर शांति भंग हो गई तो भारत की अर्थव्यवस्था पर भी बहुत ही गहरा असर पड़ेगा कोरोना की वजह से तो भारत की अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ा है और इस जख्म से निकलने से पहले ही भारत के किसान जो भारत में अन्नदाता के नाम से भी जाने जाते हैं उन्होंने भी अपना आंदोलन शुरू कर दिया और एक बार शक्ति प्रदर्शन भी किया इस को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना बड़ा फैसला सुना दिया है।
भारत के उच्च न्यायाधीश शरद अरविंद बोबदे ने पहली सुनवाई में किसानों की तरफ से लड़ रहे उनके वकील से कहा कि वह जाकर किसानों से कहें बुजुर्गों महिलाओं और बच्चों को अपने अपने घर पर भेज दे यह उच्च न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे का संदेश है। पहली सुनवाई में ही उच्च न्यायाधीश शरद अरविंद बोबदे की बेंच ने किसान आंदोलन के इस मामले को लेकर एक नई कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा था जिसमें पूर्व चीफ जस्टिस को अध्यक्ष बनाने की मांग की थी।
The High Court gave a big decision on all three laws of agriculture.
दूसरी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अपना बड़ा फैसला दे दिया है सुप्रीम कोर्ट ने कृषि के तीनों कानूनों पर अस्थाई रूप से रोक लगा दी है और एक नई कमेटी का गठन कर दिया है अब यह नई कमेटी किसानों को और सरकार को दोनों को बराबर सुनेगी और अपना फैसला सुप्रीम कोर्ट में देगी तब सुप्रीम कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
सरकार की तरफ से और किसानों की तरफ से कुछ लोगों को यह फैसला मंजूर है और दोनों ही पक्षों के कुछ लोग इस फैसले का जो सुप्रीम कोर्ट ने दिया है उसका विरोध कर रहे हैं जो सरकार की तरफ से हैं वह लोग तीनों कृषि कानूनों को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं और जो किसानों की तरफ से हैं वह कृषि के तीनों कानूनों को खत्म करने की मांग कर रहे हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला अस्थाई रूप से सुना दिया है अब दोनों ही पक्षों को इस फैसले को मानना पड़ेगा और आने वाले समय में जल्द ही सुप्रीम कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
अब जो लोग किसानों के आंदोलन के पक्ष में नहीं हैं वह लोग कह रहे हैं अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी अपना फैसला सुना दिया है अस्थाई रूप से कृषि के तीनों कानूनों पर रोक लगा दी है तो अब किसान और उनका संगठन कर रहा आंदोलन अब अपने अपने घर लौट जाएं लेकिन किसान की तरफ से यह बात निकल कर आई है जब तक कृषि के तीनों कानूनों पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता तब तक किसान आंदोलन करते रहेंगे और इस आंदोलन को शांतिपूर्वक किया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट और सरकार के अंतिम फैसले तक हम भारतीय किसान आंदोलन करते रहेंगे।


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